सेक्टर-46 का अग्रवाल परिवार: एक सप्ताह में हुई पूरी खुशियों की समाप्ति

सेक्टर-46 का अग्रवाल परिवार: एक सप्ताह में हुई पूरी खुशियों की समाप्ति

The Agarwal family of Sector-46

The Agarwal family of Sector-46

गुरुग्राम। The Agarwal family of Sector-46, एक सप्ताह पहले तक सेक्टर-46 का जो घर हर पल चहकता रहता था, वह आज वीरान है। भरा-पूरा परिवार था। बच्चे, युवा और बुजुर्ग मिलाकर छह सदस्य थे। कहीं भी सभी एक साथ जाते थे। रात में सभी एक साथ बैठकर खाना खाते थे। सुबह टहलने के लिए भी एक साथ ही निकलने का प्रयास करते थे। अब न परिवार में बच्चे रहे, न युवा और न ही बुजुर्ग। सभी एक सप्ताह के भीतर परलोक धाम को चले गए। घर के आसपास भी सन्नाटा पसरा है।

दो साल पहले राधेश्याम अग्रवाल का परिवार दिल्ली के कोटला से सेक्टर-46 में रहने आया था। दो साल पहले तक परिवार के किसी सदस्य को पड़ोसी तक नहीं पहचानते थे। मिलनसार प्रवृति की वजह से कुछ ही समय में परिवार के एक-एक सदस्य को पड़ोसी ही नहीं बल्कि सेक्टर के काफी लोग पहचनाने लगे थे। राधेश्याम अग्रवाल सेक्टर के पार्क में सुबह-शाम जाना नहीं भूलते थे।

वह बुजुर्गों एवं बच्चों से खूब संवाद करते थे। सामाजिक कार्यों में भाग लेते थे। बेटा सीए विवेक अग्रवाल एक निजी कंपनी में काम करते थे। वह सामाजिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। सामाजिक संगठनाें के लिए वह नि:शुल्क सेवा देते थे। इस वजह से कम से कम समय में सेक्टर के लोगों से उनकी नजदीकी बढ़ गई थी। सेक्टर निवासियों का कहना है कि उनलोगों ने कभी भी परिवार के किसी सदस्य के चेहरे पर उदासी नहीं देखी।

सभी हर पल मुस्कुराते रहते थे। भारतीय संस्कृति के मुताबिक अपने से बड़े को सभी दोनों हाथ जोड़कर नमस्कार करते थे। अग्रवाल परिवार के सदस्यों को देखकर काफी लाेग एक-दूसरे को हाथ जोड़कर नमस्कार करने लगे। ऐसे परिवार के ऊपर ऐसा वज्रपात हुआ कि एक सप्ताह के भीतर सबकुछ खत्म हो गया।

शादी की 50वीं सालगिरह की तैयारी चल रही थी

परिवार में राधेश्याम अग्रवाल एवं प्रेमलता अग्रवाल की शादी की 50वीं सालगिरह की तैयारी चल रही थी। सभी अपने-अपने हिसाब से तैयारी में पिछले कुछ महीनों से जुटे थे। सभी को विश्वास था कि राधेश्याम अग्रवाल बीमारी से उबर जाएंगे। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद ही एक छोटी पार्टी घर में होनी थी।

विवेक अग्रवाल के चेचरे भाई वैंकटेश गर्ग कहते हैं कि उनके चाचा से लेकर परिवार के सभी सदस्य बहुत ही मिलनसार थे। सभी सदस्याें में जबर्दस्त आकर्षण था। इस वजह से जहां भी वे रहे, कुछ ही समय में काफी लोग परिवार के नजदीक हो जाते थे।

नियमों के विरुद्ध चल रहे प्रतिष्ठानों को बंद करना ही श्रद्धांजलि होगी

सेक्टर-46 निवासी व सेवा संघर्ष समिति के प्रधान विनोद ठाकरान का राधेश्याम अग्रवाल परिवार से विशेष जुड़ाव था। वह कहते हैं कि राधेश्याम अग्रवाल और उनके परिवार के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि जितने भी अवैध होटल, गेस्ट हाउस एवं पीजी चल रहे हैं, उन्हें बंद कराया जाए।

जब तक ऐसा नहीं किया जाएगा तब तक मौत का सिलसिला खत्म नहीं होगा। आज राधेश्याम अग्रवाल का परिवार खत्म हुआ है, कल किसी और परिवार की बारी आएगी। पूरी दुनिया में पहचान बनाने वाली साइबर सिटी में हजारों अवैध होटल, गेस्ट हाउस एवं पीजी चल रहे हैं।

मेदांता अस्पताल के आसपास ही काफी संख्या में चल रहे हैं। सभी का आडिट कराने पर जोर देना चाहिए। इससे पता चल सकेगा कि किसके पास एनओसी है। होटल एवं गेस्ट हाउस में कितने रूम बनाने थे और कितने बनाए गए, यह भी आडिट से पता चल जाएगा।